सहारा समूह रिफंड सीमा बढ़कर ₹50,000 हुई
CRCS-सहारा रिफंड योजना 2026: नियमों में बड़ा बदलाव, रिफंड सीमा बढ़कर ₹50,000 हुई, जानें आवेदन और समाधान की पूरी प्रक्रिया
सहारा समूह (Sahara Group) की सहकारी समितियों में फंसे करोड़ों निवेशकों के लिए सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) और सेंट्रल रजिस्ट्रार (CRCS) की ओर से बड़ी राहत और नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की निगरानी में चलाई जा रही इस रिफंड प्रक्रिया की समय सीमा को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने प्रति जमाकर्ता रिफंड की अधिकतम सीमा को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया है।इस योजना की रूपरेखा, नियम और तकनीकी विसंगतियों को दूर करने के लिए जारी आधिकारिक गाइडलाइन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. एक आधार, एक लॉगिन: सभी दावों को जोड़ना (Clubbing) अनिवार्यपोर्टल के सख्त तकनीकी नियमों के अनुसार, प्रत्येक निवेशक का आधार नंबर अद्वितीय (Unique) होने के कारण एक व्यक्ति केवल एक ही लॉगिन आईडी बना सकता है।
एक से अधिक जमा खाते (Deposits): यदि किसी निवेशक के पास एक ही सोसाइटी या अलग-अलग सोसायटियों में एक से अधिक बॉन्ड, पासबुक या जमा खाते हैं, तो उन्हें अलग-अलग आवेदन करने की अनुमति नहीं है।
एक साथ जोड़ें (Add Claim): निवेशक को अपने एक ही मुख्य लॉगिन डैशबोर्ड पर ‘Add Claim’ (दावा जोड़ें) विकल्प का उपयोग करके अपने सभी निवेशों को एक ही बार में ग्रिड में जोड़ना होगा। यदि कोई निवेशक एक दावा भरकर सबमिट कर देता है, तो उसका आवेदन लॉक हो जाएगा और वह बाद में दूसरे खाते को नहीं जोड़ पाएगा।
2. नाम में विसंगति (Name Mismatch) होने पर समाधान की व्यवस्थाब्यूरो रिपोर्ट्स के अनुसार, कई निवेशकों के अलग-अलग बॉन्ड या सर्टिफिकेट पर नामों में मामूली अंतर है (जैसे किसी पर पूरा नाम दर्ज है और किसी पर केवल पहला व मध्यम नाम)। इसे सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से खारिज (Deficiency) होने से बचाने के लिए सरकार ने कानूनी वर्कअराउंड की अनुमति दी है:
शपथ पत्र (Affidavit):
नाम की इस विसंगति को प्रमाणित करने के लिए निवेशक को ₹10 के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर (Non-Judicial Stamp Paper) पर एक ‘नाम विसंगति शपथ पत्र’ (Name Mismatch Affidavit) नोटरी से सत्यापित करवाकर तैयार रखना होगा।
अपलोड करने की प्रक्रिया:
इस शपथ पत्र को निवेशक को पोर्टल द्वारा जेनरेट किए गए अंतिम ‘क्लेम रिक्वेस्ट फॉर्म’ (Claim Request Form) के साथ स्कैन करके अपलोड करना होगा, ताकि यह साबित हो सके कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं।
3. सहारा क्यू शॉप (Sahara Q Shop) के निवेश इस पोर्टल से बाहरसहकारिता मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सहारा क्यू शॉप (Sahara Q Shop) के जमाकर्ता इस पोर्टल पर दावा करने के लिए पात्र नहीं हैं।
कारण: सहारा क्यू शॉप को ‘कंपनी अधिनियम’ (Companies Act) के तहत एक रिटेल/FMCG कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था, न कि किसी सहकारी समिति के रूप में। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किया गया ₹5,000 करोड़ का शुरुआती रिफंड बजट केवल अधिसूचित चार कोऑपरेटिव सोसायटियों के लिए है।
नतीजा: यदि कोई निवेशक क्यू शॉप के दस्तावेज इस पोर्टल पर डालता है, तो उसका आवेदन ‘Invalid Scheme’ या ‘Society Not Eligible’ के तहत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
4. केवल इन 4 सोसायटियों के निवेशक ही पात्रयह रिफंड पोर्टल कानूनन केवल सहारा समूह की निम्नलिखित चार मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों के दावों को ही स्वीकार और सत्यापित करता है:
सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (लखनऊ)सहारायन यूनिवर्सल MULTIPURPOSE सोसाइटी लिमिटेड (भोपाल)हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (कोलकाता)स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (हैदराबाद)
5. रि-सबमिशन पोर्टल (Re-submission Portal) की शुरुआतजिन निवेशकों के आवेदनों में पहले किसी डेटा मिसमैच, नाम की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण “Deficiency” (कमी) का संदेश आया था, उनके लिए सरकार ने एक समर्पित रि-सबमिशन पोर्टल चालू किया है।आधिकारिक लिंक: निवेशक सीधे mocresubmit.crcs.gov.in पर जाकर अपने क्लेम रिक्वेस्ट नंबर (CRN) के जरिए लॉगिन कर सकते हैं और अपनी कमियों को सुधारकर (जैसे नोटरी अफ़िडेविट या सही पैन कार्ड अपलोड करके) आवेदन को दोबारा सफलतापूर्वक सबमिट कर सकते हैं।विशेष नोट: ₹50,000 या उससे अधिक के कुल सामूहिक दावों के लिए पैन कार्ड (PAN Card) अपलोड करना कानूनी रूप से पूरी तरह अनिवार्य है। सभी स्वीकृत रिफंड सीधे निवेशक के आधार-सीडेड बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) भेजे जा रहे हैं।
