बाप बेटे लगा रहे चोरी की गाड़ियां ठिकाने, बिना अनुमति हर महीने सैकड़ों गाड़ी हो रही डिस्मेंटल
प्रीतेश जैन । इंदौर में धार रोड अवैध गाड़ियों को ठिकाने लगाने का नया केंद्र बन कर उभर रहा है । बांक से लेकर सिंहासा तक बड़ी संख्या में चोरी की गाड़ियों को काट कर चंद घंटों में ठिकाने लगाने का काम बे रोक टोक धड़ल्ले से चल रहा है । चोरी और फाइनेंस की गाड़ियों को ठिकाने लगाने वाले ये संगठित माफिया देश और शहर की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे है । बाप बेटे की जोड़ी ने इंदौर से पीथमपुर तक इस अवैध कारोबार का जाल फैला रखा है । अब्दुल करीम और उसके लड़के अयान और फरहान इस कारोबार को बेहद चालाकी से संचालित करते है। तीनों ने अलग अलग भूमिका तय की हुई है जो पलक झपकते गाड़ियों को ठिकाने लगा देते है। महाराष्ट्र, गुजरात सहित देशभर के अलग अलग राज्यों से चोरी की गई कारे बड़ी संख्या में इंदौर लाकर काट दी जाती है और स्क्रैप का सामान अलग अलग व्यापारियों को बेच दिया जाता है । स्क्रैप की गई कारो के इंजन, लोहा और प्लास्टिक खरीदने वाले अलग अलग व्यापारी पहले से मुस्तैद रहते है, जो कि गाड़ी कटते ही तुरंत लोडिंग वाहनों में माल भर कर ले जाते है ।

देश की सुरक्षा से समझौता
हाल ही में हुई आतंकी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है । जहां चोरी की गाड़ियों से बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया गया था वही कई घटनाओं को रोका गया उसमें भी चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था। इंदौर में जिस तरह से अन्य राज्यों की गाड़ियां अवैध तरीके से डिस्मेंटल की जा रही है ये संदेह पैदा करती है । कई वारदातों में इस्तेमाल हुई कारे भी अक्सर इसी तरह से बिखेर कर सबूत नष्ट कर दिए जाते है। किसी बड़ी घटना के घटित होने की संभावना प्रबल है ।

पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
जिस इलाके में चोरी और फाइनेंस की गाड़िया अवैध रूप से काट कर तितर बितर की जा रही है वो मुस्लिम बहुल इलाका है साथ ही इंदौर सिटी से बाहर जाने वाला मुख्य मार्ग भी यही है । ऐसे में बड़े घटनाक्रम का इंतजार करना प्रशासन के ढुल मूल रवैये कि बानगी दिखा रहा है वही पुलिस के खुफिया नेटवर्क पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा है । सूत्रों के अनुसार कुछ पुलिसकर्मी भी अपना शुभ लाभ लेकर अप्रत्यक्ष संरक्षण दे रहे है ।

