धर्मेंद्र: बॉलीवुड के ही-मैन की अमर विरासत
Pritesh Jain। धर्मेंद्र, जिन्हें बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ कहा जाता है, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक थे, जिनकी 64 वर्षों की करियर में 300 से अधिक फिल्में शामिल हैं। उनका जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में हुआ था और 23 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने रोमांटिक हीरो से एक्शन स्टार तक का सफर तय किया और कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
धर्मेंद्र का पूरा नाम धर्मेंद्र केवाल कृष्ण देओल था, जो एक जाट सिख परिवार में जन्मे थे। उनके पिता केवाल कृष्ण एक स्कूल शिक्षक थे और मां सतवंत कौर थीं, जिनके छह बच्चे थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना के ललटन कलां के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की और इंटरमीडिएट की पढ़ाई फगवाड़ा के रामगढ़िया कॉलेज से पूरी की। बचपन से ही फिल्मों के प्रति उनका जुनून था, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि ग्रामीण और सादगीपूर्ण थी। 1958 में वे मुंबई आए और फिल्मफेयर के टैलेंट कांटेस्ट में भाग लिया, जहां वे विजेता बने।
करियर की शुरुआत
धर्मेंद्र का फिल्मी सफर 1960 में अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से शुरू हुआ। यह फिल्म छोटी थी, लेकिन इससे उन्हें पहचान मिली। शुरुआती वर्षों में उन्होंने ‘दिल बेचारा’ (1963), ‘घर आजा परदेसी’ (1963) जैसी फिल्मों में रोमांटिक भूमिकाएं निभाईं। 1960 के दशक में वे ‘बंदिनी’ (1963) और ‘हकीकत’ (1964) जैसी कला फिल्मों में उभरे, जहां उनकी सहज अभिनय क्षमता सराही गई। उन्होंने 75 हिट फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई, जो किसी भी हिंदी अभिनेता से अधिक है।

प्रसिद्धि का उदय और प्रमुख
फिल्में1970 के दशक में धर्मेंद्र एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हुए। ‘मेरा गाँव मेरा देश’ (1971) और ‘शोले’ (1975) ने उन्हें अमर बना दिया, जहां वे वीरू के किरदार में यादगार थे। ‘धर्मवीर’ (1977), ‘चंबल की कसम’ (1979) जैसी फिल्मों ने उनके एक्शन स्टार इमेज को मजबूत किया। उन्होंने हेमा मालिनी के साथ कई सुपरहिट फिल्में कीं, जैसे ‘सीधी बात नो बकवास’ (1970) और ‘जमीन आसमां’ (1972)। 1980 के दशक में ‘तेजाब’ (1988) और ‘घायल’ (1990) में सहायक भूमिकाओं से उन्होंने नई ऊंचाइयां छुईं। कुल मिलाकर, उनकी फिल्में रोमांस, एक्शन और पारिवारिक ड्रामा के मिश्रण से सजीं।

पुरस्कार और सम्मान
धर्मेंद्र को कभी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन 1997 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। 1991 में ‘घायल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। 2008 में मैक्स स्टारडस्ट अवॉर्ड्स में ‘एक्टर पार एक्सीलेंस’ और 2009 में नासिक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्राप्त हुआ। 2024 में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ के लिए आईआईएफए और जी सिने में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकन मिला। उनके योगदान को पद्म भूषण (2012) से सम्मानित किया गया।व्यक्तिगत जीवन और परिवारधर्मेंद्र की पहली शादी 19 वर्ष की आयु में प्रकाश कौर से हुई, जिनसे उनके चार बच्चे हैं: सनी देओल, बॉबी देओल, विजेता और अजीता। 1980 में उन्होंने अभिनेत्री हेमा मालिनी से दूसरा विवाह किया, जिनसे ईशा देओल और अहाना देओल पैदा हुए। उनका परिवार बॉलीवुड का एक प्रमुख वंश है, जहां सनी, बॉबी, ईशा सभी अभिनेता हैं। धर्मेंद्र अपनी पंजाबी जड़ों से जुड़े रहे और परोपकार में सक्रिय थे। हाल के वर्षों में वे परिवार के साथ समय बिताते दिखे।

उत्तरार्ध करियर और विरासत
1990 के बाद धर्मेंद्र ने पारिवारिक भूमिकाएं निभाईं, जैसे ‘यमला पगला दीवाना’ (2011) में अपने बेटों के साथ। 2023 की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में उनकी कॉमेडी टाइमिंग सराही गई। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया, जो भारतीय सिनेमा की दिशा निर्धारित करने वाली थीं। उनकी विरासत ‘ही-मैन’ की छवि, नैतिक मूल्यों और कड़ी मेहनत के रूप में बनी रहेगी।

हालिया घटनाक्रम और निधन
2025 में स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा; नवंबर में ब्रेच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुए, जहां श्वसन संबंधी दिक्कतें थीं। हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया पर अपडेट दिए कि वे वेंटिलेटर पर थे, लेकिन परिवार ने गोपनीयता की अपील की। 23 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, और अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान में हुआ। परिवार के सदस्यों, जैसे हेमा, ईशा और सनी ने शोक व्यक्त किया। उनका जाना बॉलीवुड के लिए अपूरणीय क्षति है।

