राज्यसभा चुनाव: 10 राज्यों की 24 सीटों पर सियासी परीक्षा, कई राज्यों में तस्वीर साफ तो कुछ में कांटे का मुकाबला
Pritesh Jain। संसद के उच्च सदन राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति तेज कर दी है। 10 राज्यों में होने वाले इन द्विवार्षिक चुनावों को केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव और शक्ति संतुलन की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर होने वाले इन चुनावों में कई राज्यों में परिणाम लगभग तय माने जा रहे हैं, जबकि कुछ राज्यों में आखिरी वोट तक रोमांच बना रह सकता है।
इस चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटों पर मतदान होगा। राजस्थान और मध्य प्रदेश में तीन-तीन सीटें दांव पर हैं, जबकि झारखंड में दो सीटों के लिए मुकाबला होगा। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम की एक-एक सीट पर भी चुनाव होना है।
दक्षिण भारत पर सबसे ज्यादा नजर
आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों का असर राज्यसभा चुनाव में भी दिखाई देने की संभावना है। सत्तारूढ़ गठबंधन के पास इतना मजबूत बहुमत है कि विपक्ष के लिए कोई सीट निकालना बेहद कठिन माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यहां चारों सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन के खाते में जा सकती हैं।
दूसरी ओर कर्नाटक इस चुनाव का सबसे चर्चित राज्य बनकर उभरा है। कांग्रेस सरकार होने के कारण दो सीटों पर उसका दावा मजबूत माना जा रहा है, जबकि भाजपा एक सीट सुरक्षित स्थिति में दिख रही है। चौथी सीट को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक गणित और रणनीति की जंग देखने को मिल सकती है। यही सीट राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है।
पश्चिम भारत में भाजपा का पलड़ा भारी
गुजरात और राजस्थान में भाजपा मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। गुजरात में विधानसभा में भाजपा की बड़ी बढ़त उसे अधिकांश सीटों पर स्पष्ट लाभ देती है। राजस्थान में भी सत्ताधारी भाजपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि कांग्रेस एक सीट पर अपना दावा मजबूत मान रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की क्रॉस वोटिंग नहीं होती तो इन दोनों राज्यों में परिणाम अपेक्षित दिशा में ही जाएंगे।
मध्य प्रदेश में समीकरण लगभग तय
मध्य प्रदेश की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अपेक्षाकृत कम रोमांचक माना जा रहा है। विधानसभा में भाजपा के भारी बहुमत को देखते हुए दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं। यहां किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की संभावना कम मानी जा रही है।
झारखंड में बढ़ सकता है रोमांच
झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित है। राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन और भाजपा दोनों के पास पर्याप्त राजनीतिक ताकत मौजूद है। दो सीटों में एक-एक सीट दोनों खेमों के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि छोटे दल और निर्दलीय विधायक यहां अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पूर्वोत्तर में क्षेत्रीय दलों की भूमिका
अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिलने की संभावना है। वहीं मेघालय और मिजोरम में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। इन राज्यों में राष्ट्रीय दलों की तुलना में स्थानीय राजनीतिक समीकरण ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं।राज्यसभा में क्या बदलेगा?
इन चुनावों के बाद राज्यसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच संख्या संतुलन पर असर पड़ सकता है। उपलब्ध विधानसभा गणित के अनुसार सत्तारूढ़ NDA को सर्वाधिक लाभ मिलने की संभावना है। वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन की कोशिश होगी कि वह अपनी वर्तमान ताकत को बनाए रखे और कुछ राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर राजनीतिक संदेश दे सके।
सबकी नजर कर्नाटक पर
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि किसी एक राज्य का परिणाम चुनाव बाद सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा तो वह कर्नाटक होगा। चौथी सीट का गणित, संभावित क्रॉस वोटिंग और सहयोगी दलों की भूमिका इस चुनाव को दिलचस्प बना रही है। झारखंड भी उन राज्यों में शामिल है जहां अंतिम परिणाम तक राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी रह सकती हैं।
राजनीतिक संदेश भी अहम
हालांकि राज्यसभा चुनाव सीधे तौर पर सरकार बनाने या गिराने से नहीं जुड़े होते, लेकिन इनके नतीजे राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत, विधायकों पर पकड़ और गठबंधन प्रबंधन की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। यही कारण है कि 24 सीटों का यह चुनाव राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षा से कहीं अधिक महत्व रखता है।
राजनीतिक गलियारों में फिलहाल यही चर्चा है कि क्या विधानसभा का मौजूदा गणित पूरी तरह कायम रहेगा या फिर कहीं कोई अप्रत्याशित राजनीतिक चाल चुनाव परिणामों को नया मोड़ देगी। 18 जून को मतदान और मतगणना के साथ इन सवालों के जवाब सामने आ जाएंगे।
